★एह़तिलाम से कैसे बचें?
بِسْمِ اللہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
कसरत से एह़तिलाम होना मर्द के लिए हानिकारक और भयानक बीमारी है। अगर एक महीने में दो या तीन बार हो तो इस से स्वस्थ पर प्रभाव नहीं पड़ता और न ही ये बीमारी है लेकिन अगर एक महीने में चार से छः बार हो तो ये बीमारी में शामिल होगा।
★एह़तिलाम होने के असबाब: एह़तिलाम होने के विभिन्न कारण होते हैं जिन से बचना आवश्यक है जैसे:
• बद निगाही, आला ह़ज़रत رَحْمَةُ اللہِ تَعَالٰی عَلَيْهِ फरमाते हैं:“पहले नज़र बहकती है फिर दिल बहकता है फिर सित्र बहकता है।” (अनवारे रज़ा, पेज नंबर:391)
• इ़श्क़ मोहब्बत की बातें करना।
• गन्दी फिल्में देखना।
• खट्टी चीज़ें खाना।
• हमेशा गन्दी बातें करते रहना।
• नावल पढ़ना।
★इ़लाज:
• रोगी को चाहिये कि पेशाब करके वुज़ू बना कर के सोए और सुबह़ जल्दी उठ जाए।
• दाहिने करवट सोने से एह़तिलाम कम होता है।
• रात का खाना सोने से तीन चार घंटे पहले ही और ज़रा कम ही खाये।
• सोते वक़्त ज़्यादा गरम दूध न पिये। ठन्डा या हल्का गरम पिये।
• सोने से पहले कोई अच्छी सी दीनी मालूमात वाली किताब का मुताला करे।
• खट्टी, तेज़, चटनी, ज़्यादा गोश्त वगैरह न खाया करे।
• अन्डर वियर या चड्डी वगैरह पहन कर न सोए। (क़रीना ए ज़िन्दगी, पेज नंबर:187-188, मुलख़्ख़िसन)
• “सूरह: नूह़” सोते वक़्त एक बार पढ़ कर अपने ऊपर दम (यानी फूँक लीजिए) कीजिये, اِنْ شَآء اللهُ الكريم एह़तिलाम नहीं होगा।
• सोते वक़्त दिल की जगह शहादत (अगूँठे और बीच वाली उँगली के दरमियान) की उँगली से “या उ़मर”लिखने की आ़दत बनाइये, اِنْ شَآء اللهُ الكريم शैतान के दख़ल से मह़फूज़ रहते हुए एह़तिलाम नहीं होगा। (मदनी पन्ज सूरह, पेज नंबर:205)

