तक़दीर किसे कहते हैं?
بِسْمِ اللہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
`اَلْجَوَابُ بِعَوْنِ الْمَلِکِ الْوَھَّابِ اَللّٰھُمَّ ھِدَایَۃَ الْحَقِّ وَالصَّوَابِ`
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दुनिया में जो कुछ होता है और बन्दे जो कुछ करते हैं नेकी, बदी वो सब अल्लाह पाक के इ़ल्मे अज़ली के मुताबिक होता है। जो कुछ होने वाला है वो सब अल्लाह पाक के इ़ल्म में है और उस के पास लिखा हुआ है, इसी को तक़दीर कहते हैं। हर भलाई बुराई उस ने अपने इ़ल्मे अज़ली के मुवाफिक़ मुक़द्दर फरमा दी है जैसा होने वाला था और जो जैसा करने वाला था अपने इ़ल्म से जाना और वही लिख लिया तो ये नहीं कि जैसा उस ने लिख दिया वैसा हम को करना पड़ता है बल्कि जैसा हम करने वाले थे वैसा उस ने लिख दिया ज़ैद के ज़िम्मे बुराई लिखी इस लिए कि ज़ैद बुराई करने वाला था अगर ज़ैद भलाई करने वाला होता वो उस के लिए भलाई लिखता तो उस के इ़ल्म या उस के लिख देने ने किसी को मजबूर नहीं कर दिया।
बहारे शरीअ़त में है: “क़ज़ा और क़द्र के मसाइल आ़म अ़क़्लों में नहीं आ सकते, इन में ज़्यादा गौ़रो फ़िक्र करना सबबे हलाकत है, सिद्दीक़ो फारूक़ رَضِیَ اللہُ تَعَالٰی عَنْہُما इस मसले में बह़स करने से मना फरमाये गए। हम और आप किस गिनती में...!” (बहारे शरीअ़त, जिल्द:1, हि़स्सा:1, पेज नम्बर:18)
والله تعالیٰ اعلم بالصواب
संपादक: मुहम्मद ओवैस अल-अत्तारी अल-मिस्बाही
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