मुरव्वजा ताज़ियादारी का हुक्म..?
Wednesday, 2 July 2025
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मुरव्वजा ताज़ियादारी का हुक्म
संपादक: मो॰ अवैस अल अत्तारी अल मीसबाही
بِسْمِ اللہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
`اَلْجَوَابُ بِعَوْنِ الْمَلِکِ الْوَھَّابِ اَللّٰھُمَّ ھِدَایَۃَ الْحَقِّ وَالصَّوَابِ`
आला ह़ज़रत इमाम अह़मद रज़ा ख़ान رَحْمَۃُاللہِ تَعَالٰی عَلَیْہِ फरमाते हैं: “मुरव्वजा ताज़ियादारी न जाइज़ और ह़राम है। इसी तरह अ़लम,मेहदीं, इन की मन्नत, गश्त, चढ़ावा, ढोल, ताशे, मुजीरे, मर्सिये, मातम, मस्नूई़ करबला को जाना, औरतों का ताज़िया देखने को निकलना, ये सब बातें ह़राम और गुनाह, और न जाइज़ और मना हैं।
फातिहा जाइज़ है रोटी, शीरीनी, शरबत जिस चीज़ पर हो, मगर ताज़िये पर रख कर या उस के सामने होना जहालत है और उस पर चढ़ाने के सबब तबर्रुक समझना हि़माक़त है हाँ ताज़िये से जुदा(अलग) जो ख़ालिस सच्ची निय्यत से हज़राते शुहदाए किराम رَضِیَ اللہُ تَعَالٰی عَنْہُم की नियाज़ हो वो ज़रुर तबर्रुक है। (1)
मुसलमानों पर लाज़िम है कि वो अपने मातह़त को ऊपर⬆️ जिक्र की गईं खुराफात से रोकें वरना (इस्तिताअ़त होते हुए न रोकने पर) वो भी गुनाह गार होंगे।
रसूलुल्लाह ﷺ फरमाते हैं:
” `کلکم راع وکلکم مسئول عن رعیتہ`“
तर्जुमा: तुम में से हर एक निगहबान है और तुम में से हर एक से उस की रइ़य्यत(निगहबानी) के बारे में बाज़ पुर्स(पूछ गछ)होगी। (2)
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(1) `फतावा रज़विय्या`, जिल्द :24, पेज नंबर :499.
(2) `कन्ज़ुल उ़म्माल`, 6/30
والله تعالى اعلم بالصواب
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