بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

خوش آمدید

Sada e Qalb
The voice of our heart
آپ کی آمد ہمارے لیے باعثِ مسرت ہے
Sada e Qalb
The Voice of our heart

Sada E Qalb

صداۓ قلب
مؤسس: محمد کونین الصدیقی المصباحی
کسی اچھی اور معیاری تحریر کا مطالعہ انسان سے انسانیت تک کا ایک مکمل سفر ہے، ذوقِ مطالعہ اور شوقِ تحریر انسانی فکرونظرکو معراج کی آخری سرحد تک پہنچانے کا مؤثر ترین ذریعہ ہے،آئیں مطالعے کے اس سفر میں قدم قدم ساتھ چلتے ہیں۔

جب مرد چار شادی کر سکتا ہے تو عورت کیوں نہیں؟

جب مرد چار شادی کر سکتا ہے تو عورت کیوں نہیں؟



بِسْمِ اللہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
`اَلْجَوَابُ بِعَوْنِ الْمَلِکِ الْوَھَّابِ اَللّٰھُمَّ ھِدَایَۃَ الْحَقِّ وَالصَّوَابِ`

अल्लाह तआ़ला इर्शाद फरमाता है:

“ `فَانْكِحُوْا مَا طَابَ لَكُمْ مِّنَ النِّسَآءِ مَثْنٰى وَ ثُلٰثَ وَ رُبٰعَۚ`

         तर्जुमा: “तो निकाह में लाओ जो औरतें तुम्हें ख़ुश आयें दो दो और तीन तीन और चार चार” (1)

       तमाम उम्मत का इजमा है कि एक वक़्त में चार औरतों से ज़्यादा निकाह में रखना किसी के लिए जाइज़ नहीं सिवाए रसूले करीम ﷺ के ये आप के ख़साइस से है। (2)

       आज कल गै़र मुस्लिम और सैकुलर सोच रखने वाले ये सवाल करते हैं कि “ जब एक मर्द चार शादी कर सकता है तो एक औरत चार शादी क्यों नहीं कर सकती ”

      याद रखें! अल्लाह पाक के हर काम में ह़िक्मत और मसलह़त होती है। अगर औरत एक से जा़इद करेगी तो दर्जे ज़ेल⬇️ ख़राबियां लाज़िम आएँगी:

      ★ जिस औरत के एक से ज़्यादा शौहर होगें तो अब सवाल होगा कि उस का बाप कौन होगा? (जबकि आज कल हर डाक्यूमेंट्स पर बेटे और बेटी की वल्दियत लिखनी ज़रूरी होती है )।

      ★ इसी तरह अगर चन्द बच्चे पैदा हो गये तो एक प्रॉब्लम ये आएगी कि अब इन बच्चों की कफालत कौन करेगा? चूँकि आज कल अख़राजात बहुत हैं, हर कोई यही कहेगा कि मैं इस बच्चे का ख़र्चा क्यों उठाऊँ मैं ही इस बच्चे का बाप थोड़ी हूँ वगैराह वगैराह।

     ★ इस के इलावा इस में औरत से इस्तिफ़ादे का क्या मसला होगा कि हर मर्द की ख़्वाहिश होगी कि औरत से इस्तिफ़ादा सिर्फ उसी का ह़क़ है और ये बीवी किसी और के क़ब्ज़े में न जाये तो यूँ झगड़े होगें और आपस में क़त्ल की सूरत भी होगी और औरत भी उन का शिकार होगी।

       ★जब बात बीवी के खर्चे की आएगी (मसलन खान पीना, दवा आपरेशन, मेकअप वगैरह) तो ये कह कर जान बचायेगें कि मैं ही क्यों तुम्हारा खर्चा उठाऊं? क्या तुम्हारा दूसरा शौहर नहीं है?तो यूँ उस की खुशी ग़मी में बदल जायेगी।

      ★ जब उस बीवी का इंतकाल होगा तो उस की तजहीज़ और तद्फीन का भी मसला सामने आएगा कि इस की ज़िम्मेदारी कौन उठायेगा।

★ नीज़ शादी का एक मक़सद औलाद की बड़ोत्तरी भी होता है जो इस सूरत में हा़सिल न होगा।

       जबकि एक मर्द की चार बीवी हों तो मज़कूरा बाला⬆️ बातों में से कोई ख़राबी लाज़िम नहीं आएगी।



(1)`क़ुरान शरीफ`, सूरत: निसा, आयत नंबर: 3.

(2) `तफ्सीरे ख़ज़ाइनुल इ़रफान`, सूरत: निसा, आयत नंबर: 3 

लेखक: मो॰ अवैस अल अत्तारी अल मीसबाही।

والله تعالیٰ اعلم بالصواب
———————————————————————————————————————————————————
Read more 👇

0 Response to "جب مرد چار شادی کر سکتا ہے تو عورت کیوں نہیں؟"

Post a Comment

Article Top Ads

Central Ads Article 1

Middle Ads Article 2

Article Bottom Ads

-->